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सेटअप

पाँच से बारह सवाल।
और कारोबार चल पड़ा।

ज़्यादातर सॉफ़्टवेयर आपको ख़ाली डैशबोर्ड थमाकर उसे ही ऑनबोर्डिंग कह देते हैं। JRI का सेटअप एक ऐसे एजेंट से बातचीत है जिसके हाथ में औज़ार हैं — आप जो बताते जाते हैं वह उसी वक़्त आपके वर्कप्लेस में दर्ज होता जाता है। बातचीत ख़त्म होने का मतलब है कारोबार शुरू।

क्या-क्या दर्ज होता है

छह चीज़ें, जो पहले नहीं थीं

एक बातचीत, और छह चीज़ें आपके वर्कप्लेस में दर्जकारोबार और कंप्लायंस की पूरी जानकारीBrand DNA — ज़बान, ग्राहक, ख़ूबियाँब्रांड का विज़ुअल बोर्डपड़ाव-दर-पड़ाव बना रोडमैपपीछे-पीछे तैयार होता वेबसाइट ड्राफ़्टअसली दाम पर असली पैकेज का हवालाएक बातचीत

  1. 01

    कारोबार और कंप्लायंस की जानकारी

    एंटिटी का क़िस्म, धंधा, किस राज्य से चलाते हैं, टर्नओवर का दर्जा, प्रोडक्ट या सेवा, टीम का आकार — और नौ कंप्लायंस संकेत: ऑनलाइन बिक्री, दूसरे राज्यों में बिक्री, विदेशी निवेश, क़र्ज़, MSME वेंडर, ग्राहकों का डेटा, DPIIT मान्यता, ठेके पर मज़दूर और विदेशी उधार। आपका स्टैचुटरी कैलेंडर इसी से बनता है — इसीलिए यह सबसे पहले पूछा जाता है।


  2. 02

    Brand DNA

    एक लाइन में ब्रांड का परिचय, आपकी ज़बान का लहजा, दो से चार ख़ास ख़ूबियाँ और एक-दो तरह के ग्राहक। अगर वेबसाइट पहले से है तो वह पहले उसे पढ़ता है और पूरा मसौदा ख़ुद बना देता है — आप ख़ाली पन्ना नहीं भरते, बने हुए मसौदे को दुरुस्त करते हैं।


  3. 03

    ब्रांड का विज़ुअल बोर्ड

    एक बना-बनाया कैनवस — पहचान, रंगों का चयन, टाइपोग्राफ़ी, डिज़ाइन की ज़बान और सोशल मीडिया का एक नमूना। यही पहचान आगे आपके वेबसाइट ड्राफ़्ट में जाती है, इसलिए दोनों कभी अलग-अलग नहीं दिखेंगे।


  4. 04

    पड़ाव-दर-पड़ाव रोडमैप

    छह मंज़िलें — शुरुआत, बनाना, बाज़ार में उतरना, लॉन्च, बढ़ोतरी, फैलाव। हर मंज़िल में चार तक पड़ाव, हर पड़ाव में दो ठोस काम — सब आपके अपने कारोबार के लिए लिखे, किसी बने-बनाए साँचे से उठाए नहीं। हर पड़ाव के साथ लिखा रहता है कि पूरा होने पर क्या बदलेगा, आगे क्या खुलेगा, और पहले कौन-सा पड़ाव ज़रूरी है। और यह भी कि यह एजेंट कर देगा या आपको ख़ुद करना होगा।


  5. 05

    वेबसाइट का ड्राफ़्ट

    बातचीत ख़त्म करते-करते सर्वर पर बनता रहता है। आप टैब बंद कर सकते हैं — काम अपने आप चलता रहेगा और तैयार होने पर आपको ख़बर मिल जाएगी, और अगर न बन पाया तो वह भी साफ़ बता दिया जाएगा। जो ब्रांड आपने अभी तय किया, ड्राफ़्ट उसी से बनता है — असली लिखाई के साथ, भरती का मसाला नहीं।


  6. 06

    असली पैकेज का हवाला

    चालू कैटलॉग से, चालू दाम पर। न कोई गढ़ा हुआ पैकेज, न गढ़ा हुआ आँकड़ा। अगर एंटिटी अभी बनी ही नहीं तो पहले वह ढाँचा सुझाता है जो आप पर बैठे — अकेले मालिक को सीमित ज़िम्मेदारी चाहिए, या सबसे आसान शुरुआत, या पैसा जुटाने लायक़ ढाँचा — और फिर उसी का पैकेज बताता है।


बातचीत

एक बार में एक सवाल, और दोबारा कभी नहीं

एजेंट पर कुछ क़ायदे लगे हैं जो देखने में छोटे लगते हैं पर हैं बड़े। एक संदेश में एक ही सवाल। जिस सवाल के जवाब गिने-चुने हों, वह कार्ड की शक्ल में आता है जिन्हें आप छू भर देते हैं — पढ़ने वाली लंबी सूची नहीं। जो आप एक बार बता चुके, वह दोबारा नहीं पूछा जाता। नतीजा यह कि सेटअप किसी समझदार इंसान से बातचीत जैसा लगता है, फ़ॉर्म भरने की जाँच जैसा नहीं।

अगर वेबसाइट या रजिस्टर्ड एंटिटी पहले से है तो सवाल और कम — जो मौजूद है उसे पढ़ लेता है, दोबारा नहीं पूछता।


  1. 01कारोबार क्या है — अपने ही लफ़्ज़ों में

  2. 02रजिस्टर्ड है, या अभी शुरू ही कर रहे हैं

  3. 03एंटिटी का क़िस्म — और उलझन हो तो सुझाव

  4. 04धंधा — पूछा नहीं, बस पक्का किया जाता है

  5. 05किस राज्य से चलाते हैं

  6. 06टर्नओवर का दर्जा, प्रोडक्ट या सेवा, टीम का आकार

  7. 07कंप्लायंस — नौ संकेत, एक ही बार में

  8. 08आपका ब्रांड — बने मसौदे पर मुहर

  9. 09ब्रांड बोर्ड, अगर आप चाहें

  10. 10जो पैकेज बैठे, उसके असली दाम पर

उसी दिन आप कर सकते हैं


  1. 01

    ढंग की इनवॉइस बनाइए

    GST के हिसाब से — सप्लाई टाइप, HSN/SAC और ई-इनवॉइसिंग, जो आपकी एंटिटी पर सचमुच लागू हो।


  2. 02

    ग्राहक और वेंडर जोड़िए

    एक-एक करके या एक साथ इम्पोर्ट करके — बिल बनाने के लिए तैयार।


  3. 03

    जो बेचते हैं वह दर्ज कीजिए

    प्रोडक्ट और सेवाएँ, दाम और HSN/SAC कोड के साथ, एक ही कैटलॉग में।


  4. 04

    अपनी वेबसाइट लाइव कीजिए

    सेटअप के दौरान बना ड्राफ़्ट आपके अपने पते पर लाइव होता है — और वह आपकी असली प्रोडक्ट लिस्ट पढ़ता है, इसलिए कभी पुरानी नहीं पड़ती।


  5. 05

    माहिर को बुलाइए

    JRI ने जो पैकेज चुना वह चालू कैटलॉग का असली हवाला है। हाँ कहने पर तय दायरे की रिक्वेस्ट खुलती है, सेल्स कॉल नहीं।


यह हिस्सा दो बार पढ़ने लायक़ है

आपकी वेबसाइट आपका असली कैटलॉग पढ़ती है

सेटअप में बनी साइट अपने अलग पते पर लाइव हो सकती है। साँचे से इसका फ़र्क़ यह है कि यह आपके डेटा से चलती है — आपका चालू वर्कप्लेस पढ़ती है: प्रोडक्ट, उनके दाम और HSN/SAC कोड, इनवॉइस, ग्राहक, कॉन्ट्रैक्ट, कंप्लायंस की हालत, टीम, बैंक खाते, ब्रांड असेट। कैटलॉग में दाम बदलिए और लाइव साइट पहले से ही दुरुस्त है। यह आपके कारोबार की नक़ल नहीं जो पुरानी पड़ जाए — यह उसी की एक खिड़की है।

सेटअप क्या नहीं करता

साफ़-साफ़ हद


  • यह रजिस्ट्रार के यहाँ कुछ फ़ाइल नहीं करता। जो जानकारी यह दर्ज करता है, फ़ाइलिंग उसी पर बनती है — पर फ़ाइलिंग ख़ुद माहिर का काम है, तय दाम और तय दायरे के साथ।


  • वेबसाइट अभी ड्राफ़्ट है। आप देखिए, बदलिए, और फिर तय कीजिए कि लाइव करनी है या नहीं। आपकी तरफ़ से कुछ अपने आप पब्लिश नहीं होता।


  • पैकेज एक हवाला है। हाँ कहने पर तय दाम के साथ तय दायरे की रिक्वेस्ट खुलती है — न पैसा कटता है, न सेल्स कॉल आती है।


  • आपकी तरफ़ से कुछ भी दस्तख़त नहीं होता। कॉन्ट्रैक्ट, फ़ाइलिंग और भुगतान — फ़ैसला आपका ही रहता है।


बातचीत शुरू कीजिए

एक दोपहर लगती है। उसके बाद आप ग्राहक को इनवॉइस भेज सकते हैं, अपना कैटलॉग डाल सकते हैं, साइट लाइव कर सकते हैं — और आपकी फ़ाइलिंग पर एक माहिर पहले से नज़र डाल रहा होगा।