Jri.AI
अर्ली एक्सेस · भारत
जहाँ फ़ाउंडर और AI मिलकर कारोबार चलाते हैं। शुरू कीजिए, कंप्लायंट रखिए, और रोज़ चलाइए — सब एक ही जगह।
पहली बातचीत
5–12सवाल। और कारोबार चल पड़ा।
सेटअप कोई फ़ॉर्म नहीं, बातचीत है। आप अपने लफ़्ज़ों में बताइए कि कारोबार क्या है — JRI सिर्फ़ वही पूछेगा जो वह ख़ुद न समझ सके, और जो समझा वह लिखता जाएगा। आख़िर में आपके सामने ख़ाली डैशबोर्ड नहीं, आपकी अपनी कंपनी होगी।
अगर वेबसाइट या रजिस्टर्ड एंटिटी पहले से है तो सवाल और कम — जो मौजूद है उसे पढ़ लेता है, दोबारा नहीं पूछता।
उसी दिन आप कर सकते हैं
- 01ढंग की इनवॉइस बनाइएGST के हिसाब से — सप्लाई टाइप, HSN/SAC और ई-इनवॉइसिंग, जो आपकी एंटिटी पर सचमुच लागू हो।
- 02ग्राहक और वेंडर जोड़िएएक-एक करके या एक साथ इम्पोर्ट करके — बिल बनाने के लिए तैयार।
- 03जो बेचते हैं वह दर्ज कीजिएप्रोडक्ट और सेवाएँ, दाम और HSN/SAC कोड के साथ, एक ही कैटलॉग में।
- 04अपनी वेबसाइट लाइव कीजिएसेटअप के दौरान बना ड्राफ़्ट आपके अपने पते पर लाइव होता है — और वह आपकी असली प्रोडक्ट लिस्ट पढ़ता है, इसलिए कभी पुरानी नहीं पड़ती।
- 05माहिर को बुलाइएJRI ने जो पैकेज चुना वह चालू कैटलॉग का असली हवाला है। हाँ कहने पर तय दायरे की रिक्वेस्ट खुलती है, सेल्स कॉल नहीं।
वादा यही है — एक दोपहर की बातचीत, और कारोबार कारोबार करने लगे।
Jri.AI for Consultants
JRI.AI से क्लाइंट लीजिए। या AI से अपने क्लाइंट चलाइए।
Consultant नेटवर्क में शामिल होकर JRI.AI इकोसिस्टम से मिले-जुले क्लाइंट पाइए, या अपनी मौजूदा प्रैक्टिस लाकर AI टूल से काग़ज़ात, रिमाइंडर, पेमेंट और रिपोर्ट सँभालिए।
CA, अकाउंटेंट और बिज़नेस कंसल्टेंट के लिए बना।
पूरे कारोबार के लिए
एक ही वर्कस्पेस
यहाँ कारोबार का काम बँटा रहता है — कुछ CA साहब के WhatsApp पर, कुछ PDF के फ़ोल्डर में, कुछ तीन अलग पोर्टलों पर, और एक ऐसी शीट में जिस पर ख़ुद आपको भरोसा नहीं। JRI रजिस्ट्रेशन, कंप्लायंस, कॉन्ट्रैक्ट, रोज़ का कामकाज, ब्रांड और अपने इंतज़ाम के टूल — सबको एक जुड़े हुए वर्कस्पेस में ले आता है। तैयारी AI कर देता है, और CA, CS या वकील बस एक दरख़्वास्त की दूरी पर — जब कहिए, तब हाज़िर।
AI संदर्भ जोड़ता है, काग़ज़ात पढ़ता है और अगला क़दम लिख देता है। मगर ड्राफ़्ट को फ़ाइलिंग, मंज़ूरी या क़ानूनी राय वह नहीं बनाता — यह हद पूरे प्रोडक्ट में साफ़ रखी गई है।
कारोबार वहीं से शुरू कीजिए जहाँ आप पहले से हैं
शुरू कीजिए। कंप्लायंट रखिए। चलाइए।
बुनियाद सही रखिए
वही ढाँचा चुनिए जो आपके असल कामकाज से मेल खाए — मालिकाना हक़, ज़िम्मेदारी, पैसा जुटाने की योजना और गवर्नेंस। उसके बाद रजिस्ट्रेशन का पूरा सिलसिला, काग़ज़ात की पूरी ख़बर के साथ।
ढाँचों की तुलना कीजिए →कंप्लायंस वक़्त पर
आपकी एंटिटी पर बनने वाली हर फ़ाइलिंग, आपके चालू रजिस्ट्रेशन से जुड़ी और असल कैलेंडर पर तय। कुछ भी किसी के इनबॉक्स में पड़ा-पड़ा जुर्माना नहीं बनेगा।
कंप्लायंस देखिए →रोज़ का कामकाज
इनवॉइस, ख़र्च, वेंडर, स्टॉक, बैंकिंग, तनख़्वाह और टैक्स के रिकॉर्ड — सब एक ही जगह। और जहाँ किसी जानकार की ज़रूरत पड़े, उसी स्क्रीन से बुला लीजिए।
Console खोलिए →आपका रोडमैप
कारोबार, मंज़िल-दर-मंज़िल
JRI को बताइए कि आप क्या बना रहे हैं — वह पूरा रास्ता सामने रख देगा। रजिस्ट्रेशन से लेकर बढ़ोतरी तक हर पड़ाव, उसी तरतीब में जिसमें वे सचमुच खुलते हैं। जब तक पिछली शर्त पूरी न हो, अगला क़दम बंद रहता है — ताकि एंटिटी बने बिना कोई GST की अर्ज़ी न लगा बैठे।
आपके धंधे के हिसाब से
- D2C ब्रांड
- SaaS स्टार्टअप
- क्रिएटिव एजेंसी
- कैफ़े / रेस्टोरेंट
- 01शुरुआतएंटिटी का रजिस्ट्रेशन, GST, कारोबारी बैंक खाता
- 02बनानादुकान या प्रोडक्ट, सामान का इंतज़ाम, ट्रेडमार्क, वेंडर और MSME कंप्लायंस
- 03लॉन्चलॉन्च कैंपेन, पहली बिक्री, बहीखाता चालू
- 04बढ़ोतरीरेंज बढ़ाइए, बढ़ने का पैसा देखिए
- 05फैलावअगली मंज़िल के लिए टीम, सिस्टम और गवर्नेंस
यह एजेंट कर देगा
प्रोडक्ट
छह हिस्से, एक ही कारोबार
01Contractsक्लॉज़-दर-क्लॉज़ जाँच के साथ ड्राफ़्ट, समीक्षा और बातचीत — और किसने क्या बदला, इसका पूरा हिसाब।
02Complianceआपकी एंटिटी और चालू रजिस्ट्रेशन से ख़ुद बनता आपका स्टैचुटरी कैलेंडर।
03Consoleइनवॉइसिंग, ख़र्च, ख़रीद, स्टॉक, बैंकिंग, POS और रिपोर्टिंग — एक ही परत में।
04Growthपेशकश, कैंपेन और पाइपलाइन — और उसी के भीतर Brand DNA: कारोबार की पहचान, ज़बान और रंग-रूप, एक बार तय और हर जगह इस्तेमाल।
05Amplifyरोडमैप को ऐसे प्रोजेक्ट, काम और कैंपेन में बदलिए जिन्हें एजेंट सचमुच उठा लें — और उसी के भीतर Apps System: सादी ज़बान में टूल बताइए, बिल्ड जाँचिए, फिर वर्कप्लेस में चलाइए या वे ब पर लाइव कर दीजिए।
06Expert on demandतय दायरे में माहिरों का काम — क़ानूनी, टैक्स, HR, IP, फ़ंडिंग — असल कारोबारी संदर्भ से जुड़ा।
यहीं से शुरू कीजिए
कंपनी बनाने के
आठ रास्ते
ढाँचा वैसा ही होना चाहिए जैसे आप सचमुच काम करेंगे — मालिकाना हक़, ज़िम्मेदारी, पैसा जुटाने की योजना, गवर्नेंस सँभालने की गुंजाइश और संस्था का मक़सद। फ़ाइलिंग का रास्ता चुनने से पहले गाइड आठों विकल्प खोलकर रख देती है।
सभी ढाँचे देखिए
Private Limited Companyफ़ंडरेज़िंग, ESOP, संस्थागत निवेशक
Limited Liability Partnershipपार्टनर चलाएँ, कंप्लायंस हल्का
One Person Companyअकेले फ़ाउंडर, ज़िम्मेदारी सीमित
Proprietorshipसबसे तेज़ शुरुआत, ज़िम्मेदारी असीमित
Partnership Firmदो या ज़्यादा पार्टनर, औपचारिकता कम
Public Limited Companyसार्वजनिक पूँजी, गवर्नेंस सबसे भारी
Section 8 Companyग़ैर-मुनाफ़ा और सामाजिक मक़सद
Nidhi Companyसदस्यों के बीच क़र्ज़ और बचत
सवाल